वो कहती है..
"बताओ बेसबब क्यूँ रूठ जाते हो..?"
मैं कहता हूँ...
"ज़रा मुझको मनाओ ..अछा लगता है.."
वो कहती है...
"मेरा दिल तुमसे आखिर क्यूँ नहीं भरता..?"
मैं कहता हूँ...
"मुहोबत की कोई हद नहीं होती.."
वो कहती है...
"बताओ मैं तुम्हें क्यूँ भा गयी इतना..?"
मैं कहता हूँ...
"मेरी जान हादसे तो हो ही जाते हैं.."
वो कहती है..
"अचानक मैं तुम्हे यूँ ही रुला दूँ तो...?"
मैं कहता हूँ...
"मुझे डर है की तुम भी भीग जाओगी.."
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