Saturday, 30 April 2011

Ode to Scarlett O'Hara





Oh dear Ms. Scarlett,
how you've been portrayed.
You've been so misunderstood,
so people listen to what I have to say.....

Ms. Scarlett O'Hara,
from Gone with the Wind,
so many people dislike you,
because of your sins.

You were lost,
and you were confused,
that is why you had no one,
you were just used.

You had no one for you to turn,
no one would lend an ear,
Rhett didn't even want to listen,
something that started with Frankly my dear.

Well it's time Ms. Scarlett,
for the hatred of you to die.
You are a lost soul,
just searching for what is right.

You are only human,
aren't the rest of us?
So why my dear Scarlett,
are you so harshly judged?

If you look from Scarlett's eyes,
you will see a girl so lost,
you will see a girl,
whose reputation she had cost.

You will see she is just like us,
she has made many mistakes.
So let's give Ms. Scarlett a break,
So she can be human for God's sake.

To those of you who have read the book,
to those of you who have seen the movie,
that came from a different era,
please, just please take a second glance,
and the woman called Scarlett O'Hara. 



Author---Kimmyi



याद रखना मुझे एक खुशनुमे एहसास की तरह...



आओ आज एक बार फिर एक दुसरे को प्यार करें...
खो जाएँ एक दुसरे की यादों में...
वो सुनहरी यादें जिस में बस मैं रहूँ तुम रहो...
वो पहली मुलाकात वो... पहला इजहार...
वो पहली बारिश का मौसम... वो पहला तकरार...
वो रूठना मनाना... वो ठंडी हवाओं का बहना...
वो तुम्हारे घर के सामने बैठ कर...
घंटो तुम्हारा इंतज़ार करना...
वो चोरी छिपे मिलना... वो सुनसान राहों पर चलना...
वो छोटी छोटी बातों पर झगरना...
और फिर उन्ही बातों को याद कर जोर जोर से हसना...
वो घंटो एक दुसरे से बात करना...
और फिर एक कॉल मिस हो जाने पर रूठ जाना...
आओ आज एक बार फिर एक दुसरे को प्यार करें...
खो जाएँ एक दुसरे की यादों में...
कल पता नहीं क्या होगा... वो तो एक अन्धकार है...
कल को सोच कर हम क्यूँ अपने आज को बर्बाद करें...
आओ फिलहाल जी लें इन लम्हों को...
आओ एक बार फिर एक दुसरे को प्यार करें....


आगे पता नहीं क्या होगा...इन लम्हों को फिलहाल जी लेने दे

तुम्हारे साथ बताये हर लम्हे को...
मैं अपने साथ संजोग कर रखता हूँ...
ना जाने जीवन के किस लम्हे में..
मुझे तेरी याद आ जाये..
और जिस लम्हे में तुझे मेरी याद आ जाये...
उस लम्हे में तू कभी गम मत करना...
मुस्कुरा देना उस लम्हे में..
अपनी आखों को कभी तू नम मत करना..!!!!

Saturday, 23 April 2011

सबसे आमिर हूँ मैं....


वो कहती है..
"बताओ बेसबब क्यूँ रूठ जाते हो..?"
मैं कहता हूँ...
"ज़रा मुझको मनाओ ..अछा लगता है.."

वो कहती है...
"मेरा दिल तुमसे आखिर क्यूँ नहीं भरता..?"
मैं कहता हूँ...
"मुहोबत की कोई हद नहीं होती.."

वो कहती है...
"बताओ मैं तुम्हें क्यूँ भा गयी इतना..?"
 मैं कहता हूँ...
"मेरी जान हादसे तो हो ही जाते हैं.."

वो कहती है..
"अचानक मैं तुम्हे यूँ ही रुला दूँ तो...?"
मैं कहता हूँ...
"मुझे डर है की तुम भी भीग जाओगी.."


कुछ अफ़साने दिल के.....

बीत गए वो दिन जब तेरी याद में बैठकर रोया करते थे...
अब तो आंसू भी निकलते हैं
अपना रास्ता पूछ कर...




हमारी ज़िन्दगी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई...
ना उसे समेट पाए ....
और ना ही सजा पाए... 




ऐ-ज़ालिम ऐसे ना जा हमे तनहा अकेला छोरकर 
तेरी याद ना जीने देती है...
ना मरने देती है..
तू कहती है मुझे भूल जा...
अरे कैसे अलग करूँ इस दिल को...
जिसके हर एक धरकन में तू बस्ती है.


बस यही अर्जियां मैं अपने खुदा से दिन में सौ बार करता हूँ 
तेरी आखों में ख़ुशी...
और होठों पे हशी की दुआ करता हूँ.
अरे हमारा क्या है हम तो फकीर हैं..
बस अगले जनम फिर से तेरे आशिक बन्ने की दुआ करता हूँ.

वक़्त के नाजुक लम्हों में साथ छोरा तुमने...
सपने दिखाए साथ जीने के, आज तनहा छोरा तुमने...
ऐक वो भी दौर था ऐक ये भी दौर है...
विश्वास के दामन से बन्धे थे वो डोर..
पर किसे पता था उसकी गाठें इतनी कमजोर हैं...