Saturday, 16 June 2012

"बचपन याद आता है..."


बचपन के दिन बहुत याद आते हैं...
उस आकर्शन की डोर में बढ़ते चले जाते हैं...!!!
वो लरकपन वो मासुमियत हम भूल गए शायद...
अब तो परेशानियों के बल पर जाते हैं...
बचपन के दिन बहुत याद आते हैं...!!!

कंचे खेला करते थे...झूले झूला करते थे...
और नाप लेते थे आसमान बिना किसी फीते के...!!!
बचपन की वो अमिरी ना जाने कहाँ खो गयी...
जब बारिश के पानी में हमारे भी जहाज चला करते थे...!!!

जब छोटे थे तब बड़े होने की बड़ी चाह थी...!!!
अब पता चला की -
अधूरे एहसास और टूटे सपनों से...
अधूरे होम-वर्क और टूटे खिलोने अच्छे थे...!!!!




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