Wednesday, 18 April 2012

"तड़पता आशिक..."


वो जान क्या देंगे, जिन्हें इंतज़ार करना नहीं आया...
वो जियेंगे क्या, जिन्हें प्यार करना नहीं आया...!!!!

हम भी मुहोबत जुल्मों  शितम  के मारे हैं...
वो, बेवफाई करती रही हमसे ,
और हमे आहें भरना नहीं आया...!!!!

यूँ , तो वो हमारा शिकार करते ,
शिकारी  हो गए...
और हमे दुनिया के नज़रों में गिरा ,
खुद दुलारी हो गए...!!!!

हमने तो इतने फटकार खाये कि ,
उसके बूंद प्यार के भिखारी हो गए...!!!!

खुदा करे हमारे मासुम इश्क कि
जान निकल जाये...
पर ये जनाजा उनकी गली से ही जाए ,

हम अपने खुन से लिखते जायेंगे ,
उनका नाम उस गली में ,
ताकि जब भी वो उस गली से निकले ,
उसकी आखों में आंसु भर आये...!!!!

यूँ तो हम भी नहीं चाहते आंसु 
उनकी आखों में ,
पर....

जमाना जब भी देखे उसकी आखें ,
ये तड़पता आशिक नज़र आये...!!!!!! 


Monday, 16 April 2012

"मेरी ज़िन्दगी...."


कि सावन में भी प्यासी मेरी ज़िन्दगी...
अँधेरे कि तरह सुनसान मेरी ज़िन्दगी...
उस धुएं कि तरह लापता मेरी ज़िन्दगी...
अपने ही जाल में फ़सी मेरी ज़िन्दगी...!!!!

कि सरीफ़ों के महफ़िल में बदनाम मेरी ज़िन्दगी...
भूखे और प्यासे जैसी लाचार मेरी ज़िन्दगी...
कि न्याय और धर्म  के बीच लटकती मेरी ज़िन्दगी...
कि जिंदा है जिस्म, पर रूह से मरी मेरी ज़िन्दगी...!!!!

वसंत में भी सूखे सी जंजर मेरी ज़िन्दगी...
मिट्टी के घरोंदों सी कमजोर मेरी ज़िन्दगी...
अमावश में सन्नाटे से चीखती मेरी ज़िन्दगी...
कि हर तरफ है हरियाली पर, वीरान मेरी ज़िन्दगी...!!!!

तन्हाईयों में वीरान मेरी ज़िन्दगी...
कि कोयला भी तप कर हिरा बन जाता है...
पर उस कोयले से लिपटी कारीख मेरी ज़िन्दगी...
कि नग्न पड़ी लाश, बिन कफ़न मेरी ज़िन्दगी....!!!!!!


Thursday, 5 April 2012

"मेरी लाचारी या तुम्हारे लिए मेरा प्रेम..."????


मैं तुम्हें भुलाने की रोज़ कोशिश करता हूँ...
विश्वास  मानो मेरा..
के खुद को तुम्हारे ख्यालों से बहुत दूर ले जाऊं
ये रोज़ कोशिश करता हूँ...

पर---
तुम्हें दिल से निकलता हूँ तो तुम दिमाग में बस जाती हो...
        दिमाग से निकलता हूँ तो तुम जिस्म में बस जाती हो...
        जिस्म से निकलता हूँ तो तुम निगाहों पे बस जाती हो...
        निगाहों से निकलता हूँ तो हूठों पे बस जाती हो...!!!


पता नहीं आज क्या हो चला है...
दिल आज क्यूँ बहक रहा है...
रातें सुलग रही हैं
दिन क्यूँ चहक रहा है....!!!


क्यूँ आज फिर दिल बच्चा हो जाने को करता है..
क्यूँ आज फिर तुमसे लिपट कर रोने को दिल करता है...
क्यूँ आज फिर तुम्हारे नाम पर मुस्कुराने को दिल करता है...
क्यूँ आज फिर तुम्हारे गोद में सर रखकर सोने को दिल करता है...
क्यूँ आज तुम्हारे आखों में डूब जाने को दिल करता है...
क्यूँ आज तुम्हारे बातों में खो जाने को दिल करता है...!!!!???


क्यूँ आज तुम्हे जी भर कर देखने का मन हो रहा है मुझे...
क्यूँ आज तुमसे मिलने का मन हो रहा है मुझे...
क्यूँ आज फिर तुम्हे i love u  कहने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर तुमसे i love u  सुनने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर तुम्हे छुने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर तुम्हारे लिए घंटो इंतज़ार करने को दिल चाहता है...!!!!???


क्यूँ आज फिर अच्छा पहनने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज  फिर अच्छा दीखने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर से बारिश में भीगने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर से सपने बुनने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर से मुस्कुराने को दिल चाहता है...!!!!???


क्यूँ आज फिर से ज़िन्दगी पे खुश होने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर बाहें फैलाकर गाने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर से तुमसे प्यार करने को दिल चाहता है...
क्यूँ आज फिर से जीने को दिल चाहता है...!!!!????


आज शायद अपने दिल पर मेरा कोई काबू नहीं...
आज शायद अपनी भावनाओं पर मेरा कोई वश नहीं...


के दिल तो बच्चा होता है...
और गलतियाँ कर बैठता है...

पर पता नहीं...
तुम मेरी इन गलतियों का क्या निष्कर्ष  निकालोगे---
"तुम्हारे लिए मेरा प्रेम या मेरी लाचारी... "
ये तो तुम ही मुझे बतलाओगे  !!!