क्यों इतराती ये नज़र
क्यों घबराती ये नज़र
कत्ल करके अब हमारा
क्यों शर्माती ये नज़र....
नज़रो से नज़र जो मिले
दिल में समाती ये नज़र
बंद आखों से भी उनका
दीदार कराती ये नज़र....
बयां न हो जो जुबां से
बयां कर जाती ये नज़र
तेरें दिल में भी घर कर लेती
अगर मेरे पास होती ये नज़र...